पलकों को जोड़ कर

Poetry by Prashant V Shrivastava
Poetry by Prashant V Shrivastava

पलकों को जोड़ कर, एक आशियाँ बनाया था
आँखों की झीलों में फिर चाँद उतर आया था
आहिस्ता से लबों पे खिलने लगा तबस्सुम गुलाबी
वो शख्स जब आंखें झुकाते हुए मुस्कुराया था

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